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संतान प्राप्ति के लिए की जाती है अक्षय नवमी को आंवले के पेड़ की पूजा




संतान प्राप्ति के लिए की जाती है अक्षय नवमी को आंवले के पेड़ की पूजा

Akshay Navmi



2019-11-04 15:11:55
: आपकी खबर.कॉम

संतान प्राप्ति के लिए की जाती है आंवला(अक्षय) नवमी (Akshay Navmi 2019) को पूजा 




Dharm Desk -उत्तरी भारत में का​र्तिक(Kartik) मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को अक्षय नवमी या आंवला नवमी का पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष 2019 में अक्षय नवमी(Akshay Navmi 2019) या आंवला नवमी 05 नवंबर  (मंगलवार) को पड़ रही है।अक्षय नवमी के दिन आंवले के पेड़ के अतिरिक्त भगवान विष्णु की भी विधि विधान से पूजा की जाती है। शास्त्रों के अनुसार, अक्षय नवमी के दिन स्नान, पूजा, तर्पण तथा अन्नादि के दान से अक्षय फल की प्राप्ति होती है। अक्षय नवमी को आंवला नवमी और कूष्माण्ड नवमी के नाम से भी जाना जाता है।

 

दिवाली के 9 दिन बाद यानी कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी को आंवला नवमी (Akshay Navmi 2019)के रूप में मनाया जाता है। इसीलिए इसे अक्षय नवमी भी कहा जाता है। ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री जी के अनुसार इस दिन आंवले के पेड़ के नीचे बैठने और भोजन करने से रोगों का नाश होता है और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन महिलाएं संतान प्राप्ति और संतान की मंगलकामना के लिए आंवले के पेड़ की पूजा करती हैं।

 

 पौराणिक मान्यताओं के अनुसार  एक बार माता लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करने आई थी। उन्हें रास्ते में भगवान विष्णु और शिव की पूजा करने की इच्छा हुई। उस समय उन्होंने तुलसी और बेल के गुण एक साथ आंवले में पाएं। तुलसी भगवान विष्णु को प्रिय है और बेल भगवान शिव को। इसी के बाद लक्ष्मी जी ने आंवले के वृक्ष की पूजा की। इससे प्रसन्न होकर शिव और विष्णु वहां प्रकट हुए। तभी से अक्षय नवमी को आंवला के पेड़ के नीचे भोजन करना और उसकी पूजा करना शुभ माना जाने लगा।

 

पण्डित दयानन्द शास्त्री जी बताते हैं कि अक्षय नवमी (Akshay Navmi 2019)के दिन आंवले के वृक्ष की पूजा होती है। कहा जाता है कि भगवान विष्णु कार्तिक शुक्ल नवमी से लेकर कार्तिक पूर्णिमा की तिथि तक आंवले के पेड़ पर निवास करते हैं। अक्षय नवमी के दिन आंवले के पेड़ के अतिरिक्त भगवान विष्णु की भी विधि विधान से पूजा अर्चना की जाती है।

 

शास्त्रों के अनुसार, अक्षय नवमी के दिन स्नान, पूजा, तर्पण तथा अन्नादि के दान से अक्षय फल की प्राप्ति होती है। अक्षय नवमी को धात्री नवमी और कूष्माण्ड नवमी नवमी के नाम से भी जाना जाता है।शास्त्रों के अनुसार अक्षय नवमी के दिन किया गया पुण्य कभी समाप्त नहीं होता। ऐसी भी मान्यता है कि इस दिन द्वापर युग का आरंभ हुआ था। कहा जाता है कि आज ही विष्णु भगवान ने कुष्माण्डक दैत्य को मारा था और उसके रोम से कुष्माण्ड की बेल उत्पन्न हुई। इसी कारण आज के दिन कुष्माण्ड का दान करने से उत्तम फल मिलता है। साथ ही आज के दिन विधि विधान से तुलसी का विवाह कराने से भी कन्यादान तुल्य फल मिलता है।

 

 

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